CM गहलोत ने PM को लिखा पत्र – कहा GST को लेकर किये वादे पुरे करे केंद्र

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जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केन्द्र सरकार से जीएसटी को लागू करते समय राज्य सरकारों से किए वादों को पूरा करने एवं केन्द्र की ओर से लागू किए जा रहे कुछ करो का अधिकार राज्य सरकारों के लिए छोड़ने का आग्रह किया है। उन्होंने केन्द्र सरकार एवं राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों में विश्वास कायम रखने के लिए प्रधानमंत्री मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। गहलोत ने प्रधानमंत्री को सोमवार को लिखे गए पत्र के माध्यम से राज्यों को जीएसटी कम्पनसेशन के भुगतान में आ रही कठिनाइयों की ओर ध्यान आकर्षित कराया है।

गहलोत ने पत्र में लिखा है कि संविधान संशोधन के तहत अनेक राज्य करों को जीएसटी में सम्मिलित करते हुए कहा था कि राज्यों को इससे होने वाले राजस्व हानि को देखते हुए कम्पनसेशन उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी (कम्पनसेशन टू स्टेट) एक्ट 2017 में राज्यों को जीएसटी को लागू करने के फलस्वरूप होने वाली राजस्व हानि की पूर्ति करने के लिए 5 वर्ष तक कम्पनसेशन देने की गारंटी दी गई है। इसलिए अब यह केन्द्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करें कि राज्यों को कम्पनसेशन की पूरी राशि बिना किसी देनदारी के मिले। उन्होंने कहा कि जीएसटी एक्ट के तहत केन्द्र सरकार कम्पनसेशन बढ़ाने या घटाने का निर्णय नहीं ले सकता है।

शून्य प्रतिशत वृद्धि की सोच न्यायोचित नहीं
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की कम्पनसेशन के अंतिम वर्ष में राज्यों को पूर्व निर्धारित 14 प्रतिशत वृद्धि के स्थान पर शून्य प्रतिशत वृद्धि की सोच अनुचित है। न्यायोचित नहीं है। केन्द्र की ओर से जीएसटी में कमी का आकलन गत वित्तीय वर्ष के मुकाबले विकास की दर 10 प्रतिशत मानकर किया जा रहा है तथा बाकी जीएसटी संग्रहण कमी को कोरोना  से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। यह एकपक्षीय निर्णय है, जो केवल केन्द्र सरकार के फायदे को ध्यान में रखकर लिया गया है, यह न्यायोचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया से ऋण लेने की जिम्मेदारी का निर्वहन करे और राज्यों को कम्पनसेशन दे।

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