Yogendr yadav का इंटरव्यू: किसानों की ट्रैक्टर परेड पर बोले- कई कमियां रही, जिसे देख नही पाए, लेकिन जो हुआ उस पर शर्म भी है और गर्व भी

Uncategorized

गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर परेड में दिल्ली में हुई हिंसा, पुलिस के साथ झड़प और लाल किले पर अलग झंडा फहराने के बाद लोगों के मन में कई सवाल हैं। इन्हीं के जवाब हमने संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य योगेंद्र यादव से लिए। उन्होंने कमियों को स्वीकार किया और माना कि इससे फिलहाल जन समर्थन कम हो सकता है।

Q. लाल किले पर झंडा फहराने और हिंसा की घटना को आप कैसे देखते हैं?

A. जो हुआ, उस पर मुझे शर्म भी है और गर्व भी। गर्व है कि पहली बार आंदोलन में इतनी बड़ी संख्या में किसान आए और ज्यादातर ने अनुशासित परेड की। शर्म इस बात पर है कि शरारती तत्वों और बदमाशों के चलते पूरे आंदोलन पर दाग लग गया। बैरिकेड काे तोड़ना, पुलिस पर हमले बहुत दुखद घटनाएं थीं। लाल किले में तिरंगे के अलावा किसी और झंडे का लगना किसी भी भारतीय के लिए शर्मसार करने वाली घटना है। शरारती तत्वों से संयुक्त किसान मोर्चा का कुछ लेना-देना नहीं है।

Q. इसमें मोर्चा आखिर सरकार और पुलिस की भूमिका पर क्यों सवाल उठा रहा है?

A. बैरियर के उस पार पुलिस के पास एक ही टेंट लगा है सरवण पंढेर का। ऐसा क्यों? किसने लगने दिया? दीप सिद्धू और लक्खा सिधाना महीनों से ऐसे काम कर रहे हैं और कुछ नहीं हुआ। कोई तो है जो इसको शह दे रहा है।

Q. जब रूट फाइनल हुए, तभी से कुछ लोग इसका विरोध कर रहे थे। ऐसे में इनके खिलाफ मोर्चे ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?

A. इसके बारे में पूरी जानकारी पुलिस और प्रशासन को दी थी। 25 तारीख को सारे वरिष्ठ सदस्य पंढेर के संगठन से मिलने और समझाने भी गए थे लेकिन वे नहीं माने तो इसकी सूचना हमने पुलिस को दे दी थी।

Q. क्या मोर्चे की तैयारियों में कहीं खामियां थीं, जिससे यह घटना हुई?

A. कमियां तो थीं, जो शरारती और बदमाश तत्व हैं, उनको रोकने में हम पूरी तरह सफल नहीं हुए। इनको लेकर रणनीति बनाने या इनके खिलाफ सही संख्या जुटाने आदि में कहीं तो चूक हुई है। हम आयोजक हैं तो जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ नहीं सकते। लगता है कि हम अनुमान लगाने में चूक गए कि इतने संगठनों में कोई पंढेर या अन्य आकर समस्या खड़ी कर सकता है।

Q. पिछले कई दिनों से क्या यह आंदोलन मोर्चे के हाथ से बहर जा रहा है?

A. बिल्कुल। इसमें कोई शक नहीं है कि बहुत सारी एक्टिविटी शरू से हो रही थीं। जब शुरू में यहां आए तब भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा था जो संगठनों के धैर्य से बाहर था। हमने इसे संभाला। लेकिन जैसे-जैसे सरकार जिद्दी होती जाती है, बातचीत में गंभीर नहीं होती है, वैसे ही ऐसे तत्वों की आवाज ज्यादा ऊंची होती जाती है। सरकार के अड़ियल रवैये की वजह से ऐसे लोग बढ़ते जाते हैं, जिन पर नियंत्रण नहीं होता।

Q. परेड निकालने के लिए जो NOC मिली थी, उसमें 36 शर्तें थीं लेकिन वे नहीं मानी गईं?

A. हमने ज्यादातर शर्तें पूरी की हैं। पुलिस ने कहा था कि कुछ बातें कागजी कार्रवाई के लिए लिखनी पड़ती हैं। हमने 5 हजार ट्रैक्टरों की लिमिट सवाल उठाया था। लेकिन कहीं तो सहमति बनानी होती है। जहां हमारी परेड हुई, हमने सभी शर्तें मानी हैं, शरारती तत्वों ने ही शर्तें तोड़ी हैं।

Q. अब आंदोलन के प्रति जन समर्थन कम होगा?

A. नुकसान तो होगा। शुरू में जो सामने आया वो ऐसा था जैसे कि आंदोलन के लोगों ने सब किया। जैसे-जैसे लोगों को सच पता चलेगा, तो लोगों का विश्वास फिर से बढ़ेगा।

Q. मोर्चे के पास भी हिंसा के इनपुट थे फिर भी इतने रूट्स पर परेड का निर्णय कितना सही है?

A. नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। जो भी इनपुट मिले उन पर हमने कार्रवाई की। ऐसे बड़े आंदोलन में इस तरह के इनपुट तो मिलते ही हैं।

Q. आगे आंदोलन की क्या दिशा रहेगी?

A. आगे इस तरह के शरारती तत्व माहौल खराब न कर पाएं, उसके लिए सख्त रणनीति बनाई जाएगी। जो कमियां रही हैं उन्हें दूर किया जाएगा।

Q. दीप सिद्धू कई बार मोर्चा के मंच पर आकर भाषण दे चुका है, उसे जब NIA का नोटिस मिला तब तो किसान मोर्चा उसके साथ खड़ा था?

A. दीप सिद्धू और लक्खा सिधाना दोनों शुरू में बोले थे। जहां तक मेरी जानकारी है, दो तीन सप्ताह से इन पर एक अनौपचारिक बैन लगा दिया था। इसी के चलते इन्होंने सोमवार को मंच पर विवाद किया था। अम्बाला के शंभु बॉर्डर पर भी दीप सिद्धू ने अपना अलग टेंट लगाया था और कोशिश की थी कि पंजाब की जत्थेबंदियों में शामिल हो जाए। सभी संगठनों ने इस बात को खारिज कर दिया था।

Leave a Reply